आज पेश होगा आम बजट!

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली
नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी की मौजूदा सरकार का आखिरी और देश का 88 वां आम बजट गुरुवार को पेश किया जाएगा। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली लगातार पांचवां बजट पेश करेंगे। इस बार के बजट पर सबकी नजरें आय कर के ढांचे में बदलाव की घोषणाओं पर टिकी है और इसके अलावा यह उम्मीद की जा रही है कि चुनाव से पहले के आखिरी बजट में कुछ लोक लुभावन घोषणाएं हो सकती हैं।

गौरतलब है कि अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में बदलाव के बाद वस्तु व सेवा कर, जीएसटी घटाने या बढ़ाने का अधिकार वित्त मंत्री के हाथ में नहीं रह गया है। इसका फैसला जीएसटी कौंसिल करती है। इसलिए चीजों के सस्ते ये महंगे होने को लेकर इस बार बजट से कोई उम्मीद नहीं है। हालांकि सीमा शुल्क का फैसला सरकार को करना है इसलिए आयातित वस्तुओं की कीमतों को प्रभावित करने वाली कुछ घोषणा हो सकती है। इसके अलावा आय कर छूट की सीमा बढ़ने, वेतनभोगी वर्ग और किसानों को कुछ फायदा पहुंचाने वाली घोषणाओं का इंतजार है।

अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले मोदी सरकार का यह आखिरी पूर्ण बजट है। इसके साथ ही इस साल आठ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। तभी माना जा रहा है कि सरकार कृषि क्षेत्र और छोटे उद्यमों पर खास ध्यान देगी। सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य पर काम कर रही है। सो, कृषि क्षेत्र के लिए कुछ बड़ी घोषणा हो सकती है। बताया जा रहा है कि आपूर्ति से जुड़ी मुश्किलें दूर की जा सकती हैं। मनरेगा जैसे कार्यक्रमों के लिए अधिक राशि आवंटित की जा सकती है और कृषि बीमा और सिंचाई व सामाजिक सुरक्षा उपायों के लिए अधिक राशि दी जा सकती है।

इसके साथ ही छोटे व मझोले उद्योगों पर सरकार अधिक ध्यान दे रही है क्योंकि ये सबसे अधिक रोजगार पैदा करने वाले क्षेत्र हैं। नोटबंदी और जीएसटी के कारण अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती और वित्तीय मजबूती पर फिलहाल विराम लगाने के आर्थिक सर्वेक्षण के सुझाव के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि सरकार वित्तीय वर्ष 2018-19 के वित्तीय घाटे के लक्ष्य को बढ़ा सकती है क्योंकि आम चुनाव से पहले लोक कल्याण के कामों पर सरकारी खर्च बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।

इस बार के बजट में जिन बातों पर ध्यान दिए जाने की संभावना है उनमें व्यक्तिगत आय कर, कृषि क्षेत्र, मनरेगा, ग्रामीण विकास, कृषि ऋण, कारपोरेट कर, न्यूनतम वैकल्पिक कर यानी मैट, रेलवे, राजमार्ग और सरकारी कंपनियों में विनिवेश आदि शामिल हैं। अभी आय कर में छूट की सीमा ढाई लाख रुपए है, जिसे बढ़ा कर तीन से साढ़े तीन लाख रुपए किया जा सकता है। इस स्लैब में करीब साढ़े चार लाख करदाता है। सरकारी खर्च और राजस्व घाटे के बीच संतुलन के के लिए जेटली अगले वित्त वर्ष में सरकारी कंपनियों में विनिवेश से एक लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रख सकते हैं।

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